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 चंद्रयान -2 द्वारा ऐसे दो तत्वों, क्रोमियम और मैंगनीज का पता लगाया गया था, जो तीव्र सौर अग्नि  की घटनाओं के दौरान कुछ स्थानों पर थे. अब तक, चंद्रमा की सतह पर इन तत्वों की उपस्थिति केवल मिट्टी के नमूनों के माध्यम से जानी जाती थी जो पहले के मिशनों के दौरान एकत्र किए गए थे.


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 06 सितंबर, 2021 को यह कहा था कि, उसके चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान ने चंद्रमा के चारों ओर अपनी 9,000 परिक्रमाएं पूरी कर ली हैं. इसरो के अधिकारियों ने यह भी बताया कि, इस अंतरिक्ष यान ने सुदूर संवेदन के माध्यम से मैंगनीज और क्रोमियम के अल्प तत्वों का पता लगाया है.

इसरो प्रमुख के. सिवन ने 22 जुलाई, 2019 को लॉन्च किए गए चंद्रयान -2 के 02 साल पूरे होने पर दो दिवसीय चंद्र विज्ञान कार्यशाला में यह कहा कि, इस दूसरे चंद्रमा मिशन का डाटा राष्ट्रीय संपत्ति है.

चंद्रयान-2 ने लगाया क्रोमियम और मैंगनीज का पता

इस कार्यशाला के दौरान एक सत्र में चंद्रयान -2 लार्ज एरिया सॉफ्ट एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (CLASS) के पेलोड परिणामों पर चर्चा हुई, जो एल्यूमीनियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, सिलिकॉन, लोहा, टाइटेनियम और सोडियम जैसे प्रमुख तत्वों की उपस्थिति की जांच के लिए चंद्रमा के एक्स रे फ्लोरोसेंस (XRF) स्पेक्ट्रा को मापता है.

यह खोज स्पष्ट रूप से आश्चर्यचकित करने वाली थी क्योंकि ये तत्व चंद्रमा पर एक प्रतिशत से भी कम वजन के हैं.

तीव्र सौर अग्नि की घटनाओं के दौरान कुछ स्थानों पर दो तत्वों, क्रोमियम और मैंगनीज का भी पता चला था. अब तक, चंद्रमा की सतह पर इन तत्वों की उपस्थिति केवल मिट्टी के नमूनों के माध्यम से पता चली थी जो चंद्रयान -2 से पहले के मिशनों के दौरान एकत्र किए गए थे.

इसरो के इस बयान के अनुसार, चंद्रयान -2 के आठ पेलोड रिमोट सेंसिंग और इन-सिचू तकनीकों द्वारा चंद्रमा का वैज्ञानिक अवलोकन कर रहे हैं.

CLASS द्वारा खोजे गए अन्य तत्व

नरेंद्रनाथ के अनुसार, CLASS सभी प्रमुख तत्वों से प्रत्यक्ष तात्विक बहुतायत का पहला सेट प्राप्त करने में भी कामयाब रहा है. ये सभी तत्व चंद्र सतह का 99% से अधिक हिस्सा बनाते हैं. चंद्रमा पर जिन तत्वों का पता लगाया गया है उनमें एल्यूमीनियम, ऑक्सीजन, कैल्शियम, सिलिकॉन, लोहा और टाइटेनियम शामिल हैं.

चंद्रयान-2 से प्राप्त नया डाटा है महत्वपूर्ण

के. सिवन ने इसरो मुख्यालय से बोलते हुए यह भी कहा कि, चंद्रयान -2 आंतरिक सौर मंडल के विकास को समझने में हमारी मदद करने में सक्षम होगा क्योंकि चंद्रमा जो एक वायुहीन आकाशीय पिंड है, उसमें सौर मंडल के प्रारंभिक वर्षों में हुई घटनाओं के प्रमाण संरक्षित हैं.

चंद्रयान -2 ऑर्बिटर पेलोड डाटा वेबसाइट pradan.issdc.gov.in के माध्यम से सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है. समय के साथ विभिन्न पेलोड्स द्वारा अधिग्रहित किए जाने पर यहां अन्य डाटा सेट भी जोड़े जाएंगे.

भारत का दूसरा चंद्र अभियान: चंद्रयान-2

चंद्रयान -2 दूसरा चंद्र मिशन था जिसे इसरो द्वारा चंद्रयान -1 के बाद विकसित किया गया था.

चंद्रयान -2 अपनी सॉफ्ट लैंडिंग में विफल रहा था और इसने लैंडर और रोवर के साथ-साथ पांच संबंधित पेलोड को खो दिया था.

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